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दिल में छेद

By Medical Expert Team

Dec 27 , 2025 | 1 min read

पूरी दुनिया में 1000 में से 10 बच्चे दिल की बीमारी के साथ पैदा होते हैं। वैसे तो दिल की बीमारी कई तरह की होती है, लेकिन हमारे समाज में इसे आम तौर पर ' दिल में छेद ' या 'दिल में छेद' के नाम से जाना जाता है।

हृदय में सबसे आम छेद को वेंट्रीकुलर सेप्टल डिफेक्ट (वीएसडी) के नाम से जाना जाता है, जो हृदय रोग से पीड़ित लगभग 26% शिशुओं में पाया जाता है।

इस तरह के छेद से पीड़ित शिशुओं में विभिन्न लक्षण हो सकते हैं जो छेद के आकार के आधार पर जीवन के विभिन्न चरणों में प्रकट होते हैं। सबसे आम लक्षण वजन न बढ़ना, दूध पिलाते समय अधिक पसीना आना, तेज़ और असुविधाजनक साँस लेना और बार-बार निमोनिया होना है।

बड़े छेदों का पता पहले ही लग जाता है और ये जानलेवा भी हो सकते हैं। इन छेदों का निदान एक साधारण परीक्षण से आसानी से किया जा सकता है जिसे इकोकार्डियोग्राफी के नाम से जाना जाता है। इनका पूर्ण इलाज संभव है और सर्जरी द्वारा इनका सुरक्षित तरीके से इलाज किया जा सकता है और इसके परिणाम बेहतरीन होते हैं। इन बच्चों के ऑपरेशन के लिए अब शिशु का वजन कोई सख्त मानदंड नहीं रह गया है। इनका ऑपरेशन अधिमानतः 1 वर्ष की आयु से पहले ही करवा लेना चाहिए। इनके उपचार में देरी से ये छेद ऑपरेशन के लायक नहीं रह जाते और जोखिम भी बढ़ जाता है।

छोटे छेद वाले बच्चे आम तौर पर लक्षणहीन होते हैं और उन्हें जल्दी हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं होती है। उन्हें बाल रोग विशेषज्ञ के पास नियमित रूप से जाना चाहिए। छोटे से मध्यम छेद को गैर-सर्जिकल तरीकों से या कैथ लैब में डिवाइस की मदद से बंद किया जा सकता है और इसके बहुत अच्छे परिणाम मिलते हैं।

मैक्स सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल, शालीमार बाग में, हम सर्जिकल और नॉन सर्जिकल दोनों तरीकों से हर तरह के छेद का इलाज कर रहे हैं और इसके बेहतरीन नतीजे मिल रहे हैं। हमारे पास बाल चिकित्सा हृदय शल्य चिकित्सक, बाल चिकित्सा हृदय रोग विशेषज्ञ, बाल चिकित्सा हृदय एनेस्थेटिस्ट और बाल चिकित्सा गहन चिकित्सा विशेषज्ञ की एक समर्पित टीम है जो इन बच्चों की देखभाल करती है और उन्हें जीवन की नई किरण देती है।

Written and Verified by:

Medical Expert Team